सीड ब्रिंजल
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भारत में कंटेनर में नीलम लॉन्ग और ब्लैक ब्यूटी जैसी बैंगन की किस्में सही देखभाल से पूरी तरह उगाई जा सकती हैं। यहाँ भारतीय मौसम और हालात के हिसाब से स्टेप-बाय-स्टेप गाइड दी गई है:
आदर्श उगाने का मौसम
उत्तर भारत: फरवरी-मार्च या जून-जुलाई में शुरू करें।
दक्षिण/मध्य भारत: साल भर उगाया जा सकता है, बेहतर पैदावार और कम कीड़ों के लिए अक्टूबर से मार्च तक सबसे अच्छा है।
कंटेनर
साइज़: कम से कम 15-20 इंच गहरा और चौड़ा। बैंगन को जड़ें और छतरी दोनों उगाने के लिए जगह चाहिए।
मटीरियल: प्लास्टिक, टेराकोटा, या ग्रो बैग (कम से कम 10-15 लीटर)।
ड्रेनेज: जड़ों को सड़ने से बचाने के लिए अच्छे ड्रेनेज होल पक्का करें।
मिट्टी का मिक्स
अच्छी तरह पानी निकलने वाला, पोषक तत्वों से भरपूर पॉटिंग मिक्स इस्तेमाल करें:
40% गार्डन की मिट्टी
30% कम्पोस्ट/वर्मीकम्पोस्ट
20% कोकोपीट (नमी बनाए रखता है)
10% रेत/परलाइट (पानी निकलने के लिए)
आप धीमी गति से निकलने वाले फर्टिलाइज़र के तौर पर नीम की खली या बोन मील भी मिला सकते हैं।
जगह और धूप
पूरी धूप (रोज़ाना 6–8 घंटे) ज़रूरी है।
बैंगन गर्म मौसम की फसल है; कंटेनर ऐसी जगह रखें जहाँ उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा धूप मिले।
अगर आप बहुत गर्म जगहों (40°C से ऊपर) में हैं, तो दोपहर में छाया दें।
बीज बोना
बीजों को घर के अंदर या छाया वाली जगह पर सीड ट्रे में लगाना शुरू करें।
जब उनमें 4–5 असली पत्तियाँ आ जाएँ (लगभग 3–4 हफ़्ते पुराने) तो उन्हें ट्रांसप्लांट करें।
हर कंटेनर में, ज़्यादा भीड़ से बचने के लिए 1 पौधा उगाएँ।
पानी देना
मिट्टी को लगातार नम रखें लेकिन गीली न रखें।
गर्मियों में, रोज़ या एक दिन छोड़कर पानी दें।
नमी बनाए रखने और खरपतवार को दबाने के लिए मल्च (सूखी पत्तियां या पुआल) का इस्तेमाल करें।
खाद
हर 2–3 हफ़्ते में ऑर्गेनिक कम्पोस्ट या वर्मीकम्पोस्ट डालें।
हर 10–15 दिन में जीवामृत या कम्पोस्ट टी जैसा लिक्विड खाद मदद करता है।
फूल आने पर, फ़ॉस्फ़ोरस वाला खाद (जैसे, केले के छिलके की खाद या बोन मील) डालें।
पॉलिनेशन और फूल आना
बैंगन के फूल सेल्फ़-पॉलिनेशन करते हैं, लेकिन कभी-कभी हाथ से पॉलिनेशन करने से पैदावार बढ़ सकती है।
पॉलेन को फैलाने में मदद के लिए सुबह फूलों को हल्के से थपथपाएं।
आम कीड़े और उपाय
- एफिड्स, व्हाइटफ्लाई: हर 7-10 दिन में नीम के तेल का स्प्रे करें
- फ्रूट बोरर: रेगुलर फलों की जांच करें, प्रभावित फलों को हटा दें
- मीलीबग्स: अल्कोहल या साबुन के घोल से थपथपाएं
- फंगल की समस्या: ऊपर से पानी देने से बचें, हवा का सर्कुलेशन बेहतर करे
कटाई के टिप्स
- पहली कटाई बुआई के 70-90 दिन बाद की जा सकती है। रेगुलर कटाई (हर 5-7 दिन में) से लगातार उत्पादन को बढ़ावा मिलता है।
नीलम लॉन्ग: लंबे, चमकदार बैंगनी फल – नरम होने पर तोड़ लें।
ब्लैक ब्यूटी: क्लासिक बड़े, चमकदार गहरे बैंगनी फल – उनके फीके पड़ने से पहले तोड़ लें।
कटाई के लिए तेज चाकू या कैंची का इस्तेमाल करें – खींचकर न निकालें!