सीड बीन्स सिलेक्शन-9
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बीन्स सिलेक्शन 9 उगाने में सबसे आसान सब्जियों में से एक है. ये जल्दी अंकुरित होते हैं, तेज़ी से बढ़ते हैं, और अगर सही तरीके से शुरू किया जाए तो ज़्यादा पैदावार देते हैं. यहाँ बीजों से बीन्स सिलेक्शन 9 उगाने के लिए एक साफ़, प्रैक्टिकल गाइड दी गई है — जो घर की बागवानी, गमलों या खेत की क्यारियों के लिए सही है.
बीज का चुनाव और तैयारी
ताज़े, अच्छी क्वालिटी वाले सिलेक्शन 9 बीजों का इस्तेमाल करें.
बीन्स को भिगोने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन 4-6 घंटे भिगोने से अंकुरण बेहतर होता है.
खराब या सूखे बीज न बोएँ.
मिट्टी की ज़रूरतें
हल्की, अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी सबसे अच्छी होती है.
आइडियल pH: 6.0 – 7.5
मिश्रण:
बगीचे की मिट्टी – 50%
कम्पोस्ट/वर्मीकम्पोस्ट – 30%
कोकोपीट या रेत – 20% (जल निकासी के लिए)
भारी चिकनी मिट्टी या पानी भरे इलाकों से बचें.
मौसम
बीन्स को गर्म मौसम पसंद है.
अंकुरण के लिए सही तापमान: 20–30°C.
आखिरी पाला पड़ने के बाद बोएं (अगर आपके इलाके में रातें ठंडी होती हैं)।
बीज कैसे बोएं
गमलों में
कम से कम 12–14 इंच का गमला इस्तेमाल करें।
1–1.5 इंच गहरे छेद करें।
हर छेद में 2 बीज डालें, हल्के से ढक दें।
कम से कम 3–4 इंच की दूरी रखें।
बगीचे की क्यारियों में
45 सेंटीमीटर की दूरी पर लाइनें बनाएं।
बीज 5–6 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाएं।
गहराई: 2–2.5 सेंटीमीटर.
पानी देना
बोने के ठीक बाद धीरे-धीरे पानी दें।
जब तक पौधे न दिखें, मिट्टी को नम (गीली नहीं) रखें।
अंकुरण के बाद: हर 2–3 दिन में पानी दें।
फंगल बीमारियों से बचने के लिए पत्तियों को पानी न दें।
सपोर्ट/ट्रेलिस
सिलेक्शन 9 आमतौर पर चढ़ने वाली/खंभे वाली बीन होती है।
जब पौधे 8–10 cm बड़े हो जाएं, तो सहारा दें:
बांस की डंडियां
नायलॉन नेट
ट्रेलिस
ज़रूरत हो तो पौधों को हल्के से बांध दें।
फर्टिलाइजिंग
बीन्स को ज़्यादा फर्टिलाइजर की ज़रूरत नहीं होती क्योंकि वे मिट्टी में नाइट्रोजन फिक्स करते हैं।
हर 20–25 दिन में एक बार वर्मीकम्पोस्ट डालें।
बहुत ज़्यादा नाइट्रोजन फर्टिलाइजर न डालें—इससे पत्तियां ज़्यादा और फलियां कम होती हैं।
कीट और बीमारी से बचाव
आम दिक्कतें:
एफिड्स
लीफ माइनर
माइट्स
पाउडरी मिल्ड्यू
इस्तेमाल करें:
हर 10 दिन में नीम के तेल का स्प्रे (5 मिली प्रति लीटर)।
अच्छी हवा और धूप बीमारी कम करती है।
कटाई
पहली कटाई: बोने के 45–55 दिन बाद।
फलियां तब तोड़ें जब वे:
मुलायम
हरी
बीजों से फूली हुई न हों
रेगुलर कटाई से ज़्यादा फूल और फलियां आती हैं।